मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, May 7, 2011

कल रात उसने सारे ख़तों को जला दिया -ग़ज़ल Gazal



दिल को जला रहा हूँ ज़माने के वास्ते
दुनिया से तीरगी को मिटाने के वास्ते

खा के गले पे तीर भी हंसना पड़ा मुझे
बस्ती में इंक़लाब को लाने के वास्ते

लो, फिर से आ गयी हैं ये नाज़ुक सी तितलियाँ 
फूलों से खुशबुओं को चुराने के वास्ते

फिर से मेरे लहू की ज़ुरूरत पड़ी उसे 
बुझते हुए चराग़  जलाने के वास्ते 

कल रात उसने सारे खतों को जला दिया 
मेरा ख़याल दिल से मिटाने के वास्ते 

'अख्तर' वफ़ा के साथ में ख़ूने  जिगर भी हो 
रिश्ता मुहब्बतों का निभाने के वास्ते 

डा. फहीम 'अख्तर' संभली
चौधरी सराय , संभल , उत्तर प्रदेश

शब्दार्थ : तीरगी-अंधेरा , इंक़लाब-क्रांति 

यह ग़ज़ल आज चौ. चरण सिंह सहकारिता भवन,  लखनऊ में संपन्न तालीमी सेमीनार में पेश हुई तो इसे हमने आपके लिए तहरीर कर ली.
इस मौक़े हमें और जनाब सलीम खान साहब को ब्लॉगिंग में अलग अलग  खिदमतें अंजाम देने के लिए बेस्ट ब्लॉगर का अवार्ड देकर सम्मानित भी किया गया .  अभी अभी सेमीनार मुकम्मल हुआ .
प्रोग्राम के फोटो आ जाएँ तो आपको दिखाता हूँ जल्द ही.
प्रोग्राम कामयाब रहा . अल्हम्दुलिल्लाह.


डा. अनवर जमाल सभा को संबोधित करते हुए 

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली डा. अनवर जमाल को ईनाम से नवाज़ते हुए

सलीम ख़ान प्रोफ़ेसर असलम जमशैदपुरी  को फूल पेश करते हुए


मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली सलीम खान  को बेस्ट ब्लॉगर के ईनाम से नवाज़ते हुए

मौलाना मुहम्मद फुरकान  क़ासमी सलीम खान को मुबारकबाद देते हुए 


डा. डंडा लखनवी, सलीम खान, अनवर जमाल, डा. अयाज़, डा. सुरेश उजाला एडिटर,  अनिल 


मीडियाकर्मी  रिपोर्टिंग करते हुए

14 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

फहीम अख़्तर संभली की बहुत शानदार गजल है!
इसे पढ़वाने के लिए आभार!

Dinesh pareek said...

Bahut hi sundar gajal pesh ki hai appne dhanyawad

ana said...

bahut badhia

शालिनी कौशिक said...

वाह ! बहुत खूब , मुकर्रर इरशाद. सुबहानल्लाह.
ye to gazal ke liye par prastut karne vale ko bahut bahut shukriya is liye ki vastav me aap blogging ko poori tarah se samarpit vyaktitva hain.

Bhushan said...

बहुत अच्छी ग़ज़ल. मुबारक.

महेश बारमाटे "माही" said...

waah waah...

kaash main bhi apni koi gazal yahaan pesh kar pata

दर्शन कौर धनोए said...

बेहद सुंदर गजल है ---तारीफे काबिल !

शालिनी कौशिक said...

dr.sahab saleem ji ko to best blogar ka samman mila hai lekin samjh me nahi aaya ki aapko kis bat ka puruskar mila hai.batana to chahiye tha.chaliye kuchh nahi badhai to ham aapko de hi sakte hain saleem ji ko bhi hamari aur se bahut bahut badhai.

Kunwar Kusumesh said...

खा के गले पे तीर भी हंसना पड़ा मुझे
बस्ती में इंक़लाब को लाने के वास्ते

क़ाबिले दाद शेर है.वाह क्या बात है.
बेस्ट ब्लोगर पुरस्कार की बधाई ,सलीम भाई को.
ऐसे शेर मुशायरा ब्लॉग के शीर्षक को सार्थक करते हैं.

DR. ANWER JAMAL said...

@ शालिनी जी ! यहाँ संक्षिप्त रिपोर्ट है . विस्तृत रिपोर्ट के लिए आपको पोस्ट में दिए गए लिंक पर जाना होगा तब आप जान जाएँगी कि हमें किस बात के लिए इनाम से नवाज़ा गया ?
बधाई के लिए शुक्रिया .

लखनऊ से अनवर जमाल .
लखनऊ में आज सम्मानित किए गए सलीम ख़ान और अनवर जमाल Best Blogger

DR. ANWER JAMAL said...

@ @ कुसुमेश जी आपकी दाद हौसला बढाती है . इस वक़्त इन्क़लाबी शायर जनाब अनवर फ़रीदी साहब भी इस पोस्ट पर आपके और दुसरे लोगों के कमेंट्स पढ़ रहे हैं .
मैं चाहता हूँ कि वे भी हमारे साथ आयें और हमारी महफ़िल की रौनक बढ़ाएं. उनका कलाम भी मैं आपके सामने पेश करूँगा जल्द ही.
शुक्रिया.

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत अच्छी ग़ज़ल.

Arunesh c dave said...

अनवर जी और सलीम भाई को पुरूस्कार मिलने पर हार्दिक बधाइंया

संजय भास्कर said...

बेहद सुंदर गजल है बधाई एवं शुभकामनाएँ.