मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, April 10, 2012

एक प्यारा सा शेर

डा. ताबिश महदी के एज़ाज़ में  ग़ालिब एकेडमी दिल्ली में ४ अप्रैल को एक मुशायरा संपन्न हुआ . वहां यह शेर कहा गया.
तुम से मिल कर सबसे नाते तोड़ लिए थे
हमने बादल देख के मटके फोड़ लिए थे
-मुईन शादाब

8 comments:

Kunwar Kusumesh said...

बढ़िया शेर है,भाई.

S.N SHUKLA said...

बहुत ख़ूबसूरत, आभार.

शिखा कौशिक said...

BAHUT KHOOB .AABHAR

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sangita said...

शानदार

DR. ANWER JAMAL said...

Lajawaab.

PARAM ARYA said...

gajab ji kalpna...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह! जी वाह! बहुत ख़ूब

कृपया इसे भी देखें-

उल्फ़त का असर देखेंगे!

Neetu Singhal said...

इतना भी प्यारा नहीं है.....